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12 मिनट पहले
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फिजिक्स साइंटिस्ट अशोक सेन को प्रतिष्ठित ‘ऑस्कर क्लेन मेडल’ से सम्मानित किया गया है। अशोक ये सम्मान पाने वाले पहले भारतीय हैं।
ये सैद्धांतिक भौतिकी (थियोरेटिकल फिजिक्स) के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और ‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज’ की ‘नोबेल कमिटी फॉर फिजिक्स’ 1988 से हर साल ये मेडल देती है।
बेंगलुरु स्थित 25 अक्टूबर को ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज’ (ICTS) ने इसकी जानकारी दी। अशोक इसी संस्थान में प्रोफेसर भी हैं।
‘स्ट्रिंग थ्योरी’ के लिए मशहूर हैं
‘स्ट्रिंग थ्योरी’ पर अपने काम के लिए मशहूर अशोक सेन को इससे पहले ‘डिराक मेडल’ और ‘ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स’ जैसे अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं।
स्ट्रिंग थ्योरी, क्वांटम थ्योरी और गुरुत्वाकर्षण के बीच की विसंगतियों को दूर करने के मुख्य प्रयासों में से एक है। इसका उद्देश्य भौतिकी की एक ऐसी नई ‘ग्रैंड यूनिफाइड थ्योरी’ खोजना है, जो बहुत छोटे उप-परमाणु कणों से लेकर विशाल आकाशगंगाओं तक, हर स्तर पर सभी कणों और बलों के व्यवहार की व्याख्या कर सके।

अशोक ने 1978 में IIT कानपुर से फिजिक्स में मास्टर डिग्री पूरी की। आईसीटीपी पुरस्कार मिल चुका है। 2009 में इन्फोसिस पुरस्कार (गणितीय विज्ञान), मिला और शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार मिला। अमेरिका की स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क, स्टोनी ब्रुक (SUNY Stony Brook) से भौतिकी में PhD की। फर्मी नेशनल एक्सेलरेटर लैबोरेटरी में पोस्टडॉक्टोरल शोध किया। स्टैनफोर्ड लीनियर एक्सेलरेटर सेंटर (SLAC), अमेरिका में शोध किया।
नोबेल पाने वाले वैज्ञानिक इस मेडल लिस्ट में शामिल
‘ऑस्कर क्लेन मेडल’ हर साल स्वीडन की स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और ‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज’ की ‘नोबेल कमिटी फॉर फिजिक्स’ देती है।
साल 1988 में शुरू किया गया यह पुरस्कार भौतिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इसका नाम स्वीडिश सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लेन के नाम पर रखा गया है।
इस पुरस्कार को पाने वालों में स्टीफन हॉकिंग, पीटर हिग्स, चेन-निंग यांग, स्टीवन वेनबर्ग और हंस बेथे जैसे नोबेल पुरस्कार विजेता शामिल हैं।
पिछले कुछ सालों में भारतीय वैज्ञानिकों को मिले शीर्ष भौतिकी सम्मानों की श्रृंखला में ‘ऑस्कर क्लेन मेडल’ सबसे नया है। प्रो. सेन की पत्नी प्रो. सुमति राव भी हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट में वैज्ञानिक रही हैं।
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उन्हें यह पुरस्कार एक ऐसे प्रोटीन (algae protein) की खोज के लिए मिला जो लाइट पड़ने पर काम करता है और जिसका इस्तेमाल नर्व सेल्स को समझने के लिए एक स्विच के तौर पर किया जा सकता है।

