Meerut IIT Graduate Prashant Chaudhary Wins Rohini Nayar Award


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8 मिनट पहले

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मेरठ के पास के गांव से IIT पहुंचे प्रशांत चौधरी अब ग्रामीण बच्चों को मोबाइल पर मुफ्त में कोडिंग और AI सिखा रहे हैं। इस पहल के लिए प्रशांत को 31 अक्टूबर को 5वां रोहिणी नैयर पुरस्कार मिला। इसके तहत उन्हें 10 लाख रुपए, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र दिया गया। उनके CodeYogi Foundation से 9 राज्यों के 120 जिलों में 3 लाख 50 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स जुड़ चुके हैं।

प्रशांत को ये पुरस्कार ग्रामीण इलाकों में टेक्नोलॉजी की पढ़ाई को आसान बनाने के लिए मिला है। नई दिल्ली में हुए समारोह में नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने उन्हें सम्मानित किया।

क्या है CodeYogi Foundation CodeYogi Foundation एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन है, जो सरकारी स्कूलों और गरीब परिवारों के बच्चों को मोबाइल के जरिए मुफ्त में कोडिंग और AI सिखाती है। साल 2020 में IIT दिल्ली के पूर्व छात्र प्रशांत चौधरी, प्रियंका सेठी और राकेश सहगल ने इसकी शुरुआत की थी। इस प्रोग्राम में बच्चों को कोडिंग सीखने के लिए महंगे कंप्यूटर या लैपटॉप की जरूरत नहीं होती। वे अपने घर के सामान्य एंड्रॉयड फोन से ही पढ़ाई और प्रैक्टिस कर सकते हैं। इसकी क्लास हिंदी और दूसरी स्थानीय भाषाओं में होती हैं, ताकि भाषा या पैसों की कमी के कारण कोई बच्चा टेक्नोलॉजी सीखने से पीछे न रह जाए।

गांव से शुरू हुआ सफर, स्टूडेंट्स को मुफ्त में सिखाई कोडिंग प्रशांत चौधरी साल 2010 में अपने गांव से IIT में दाखिला लेने वाले पहले व्यक्ति बने थे। IIT से पढ़ाई के बाद उन्होंने एक अमेरिकी स्टार्टअप के लिए घर से ही काम करते हुए अपने गांव के बच्चों को टेक्नोलॉजी सिखाना शुरू किया।

इसके बाद 2015 में उन्होंने एक इंजीनियरिंग कॉलेज में फ्री कोडिंग क्लास लेना शुरू किया। इन क्लास में इतने स्टूडेंट आने लगे कि कुछ ही समय में पूरा ऑडिटोरियम भर गया। धीरे-धीरे स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ी और कई बैच के स्टूडेंट्स ने सॉफ्टवेयर कंपनियों में नौकरी के इंटरव्यू भी क्लियर किए।

वहीं, 2020 में देहरादून शिफ्ट होने के बाद प्रशांत ने एक सरकारी पॉलिटेक्निक में फ्री सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग शुरू की। यहां पांच डिप्लोमा स्टूडेंट्स ने एप्टीट्यूड टेस्ट पास किया और ऑनलाइन क्लास के जरिए इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स के साथ पढ़ाई की। CodeYogi के मुताबिक, इन पांचों स्टूडेंट्स को सालाना 8 लाख रुपए के प्री-प्लेसमेंट ऑफर मिले।

लैब नहीं थी, इसलिए स्टूडेंट्स को कोर्स छोड़ना पड़ा इस काम के दौरान प्रशांत को एक बड़ी समस्या समझ आई। ग्रामीण और छोटे शहरों के कई स्टूडेंट्स में सीखने की क्षमता थी, लेकिन उनके पास कंप्यूटर और लैब जैसी सुविधाएं नहीं थीं।

इसी समस्या को देखते हुए 2021 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय ने उनकी टीम को राज्य के ITI और पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रोग्राम चलाने के लिए बुलाया। करीब 40 हजार स्टूडेंट्स ने एप्टीट्यूड टेस्ट दिया, जिनमें से 1,000 स्टूडेंट्स को 6 महीने के कोर्स के लिए चुना गया।

इस कोर्स में करीब 400 स्टूडेंट ही पढ़ाई पूरी कर पाए। इनमें से 80% से ज्यादा को 6 लाख रुपए सालाना से अधिक के इंटर्नशिप या प्री-प्लेसमेंट ऑफर मिले। हालांकि, कंप्यूटर लैब की सुविधा नहीं होने के कारण करीब 600 स्टूडेंट कोर्स पूरा नहीं कर सके।

इसी दौरान पहाड़ी इलाके के एक कॉलेज की कुछ लड़कियों ने बंद पड़ी कंप्यूटर लैब के बावजूद अपने मोबाइल से कोर्स पूरा किया। इस एक्सपीरियंस ने प्रशांत को सोचने पर मजबूर किया कि जब स्टूडेंट फोन से पढ़ सकते हैं, तो पूरी पढ़ाई को मोबाइल पर ही क्यों न शुरू किया जाए।

100 रुपए सालाना से कम खर्च में शुरू किया मोबाइल कोर्स इसी सोच के साथ 2023 में CodeYogi ने हिंदी-फर्स्ट मोबाइल पर होने वाला कोडिंग कोर्स शुरू किया। इसमें स्टूडेंट अपने मोबाइल पर ही पढ़ाई और प्रोग्रामिंग की प्रैक्टिस कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कंप्यूटर या लैब की जरूरत नहीं होती। संस्था के मुताबिक, इस कोर्स पर एक स्टूडेंट का सालाना खर्च 100 रुपए से भी कम आता है। मध्य प्रदेश के देवास में कुछ ही महीनों में 180 से ज्यादा सरकारी स्कूलों के 16 हजार से अधिक स्टूडेंट इस प्रोग्राम से जुड़ गए। इसके बाद दूसरे राज्यों के जिला प्रशासन ने भी स्कूल ग्रुप्स के जरिए इसकी जानकारी स्टूडेंट्स तक पहुंचानी शुरू की।

साल 2024 तक CodeYogi छह राज्यों के 60 से ज्यादा जिलों में एक लाख स्टूडेंट्स तक पहुंच चुका था। अब इसका दायरा बढ़कर 9 राज्यों और 120 जिलों तक हो गया है।

अब कोडिंग के साथ AI भी सीख रहे स्टूडेंट समय के साथ टेक्नोलॉजी में AI का इस्तेमाल बढ़ा, तो CodeYogi ने भी अपने कोर्स में बदलाव किया। अब संस्था का फोकस सिर्फ कोडिंग सिखाने पर नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स को AI टूल्स का इस्तेमाल करना सिखाने पर भी है।

इसके लिए अप्रैल 2026 में WhatsApp पर 30 दिन का AI Fluency Programme शुरू किया गया। संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दो महीनों में ही 68 हजार से ज्यादा स्टूडेंट और 3 हजार शिक्षक इससे जुड़ गए।

प्रोग्राम से जुड़ी 48.6% लड़कियां, 95% के पास सिर्फ मोबाइल इस प्रोग्राम की एक खास बात यह भी है कि इसमें अलग-अलग बैकग्राउंड के स्टूडेंट शामिल हैं। प्रशांत द्वारा पुरस्कार समारोह में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, CodeYogi से जुड़े कुल स्टूडेंट्स में 48.6% लड़कियां हैं। वहीं, करीब 95% स्टूडेंट पूरी तरह मोबाइल पर निर्भर हैं।

इसके अलावा, प्रोग्राम के 59% एडवांस्ड लर्नर्स साइंस या इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से नहीं हैं। इनमें आर्ट्स और कॉमर्स के स्टूडेंट भी शामिल हैं, जो AI और टेक्नोलॉजी टूल्स सीख रहे हैं।

3 साल में 50 लाख स्टूडेंट्स तक पहुंचने का लक्ष्य प्रशांत चौधरी को दिया गया रोहिणी नैयर पुरस्कार ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम करने वाले 40 साल से कम उम्र के लोगों को दिया जाता है। इसकी शुरुआत 2022 में अर्थशास्त्री और पूर्व प्रशासक डॉ. रोहिणी नैयर की याद में की गई थी। इस साल विजेता का चयन सिविल सोसायटी, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों की स्वतंत्र जूरी ने किया।

वहीं, प्रशांत का अगला लक्ष्य इस प्रोजेक्ट को और बड़े स्तर पर पहुंचाना है। संस्था सरकारी पार्टनरशिप के जरिए अगले तीन साल में 50 लाख ग्रामीण स्टूडेंट्स को इस प्रोग्राम से जोड़ना चाहती है। इसका फोकस ऐसे बच्चों तक कोडिंग और AI की पढ़ाई पहुंचाना है, जिनके पास आज भी कंप्यूटर लैब या दूसरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।



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