Ex-VP Launches AI Startup Warp Sciences


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4 मिनट पहले

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IIIT हैदराबाद से पढ़ाई करने वाले मनोहर पलूरी ने Meta में 14 साल तक काम किया और फिर नौकरी छोड़कर अपनी नई कंपनी Warp Sciences की शुरुआत की है। जिसे हाल ही में 215 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,800 करोड़ रुपये की फंडिंग मिल गई है। यह कंपनी AI से नई दवाएं बनाने में मदद करेगी।

IIIT हैदराबाद से Meta तक का सफर मनोहर पलूरी ने साल 2006 में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद (IIIT Hyderabad) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने सार्नोफ कॉर्पोरेशन में काम शुरू किया। यहां वे कंप्यूटर विजन से जुड़े उनके काम में वीडियो का एनालिसिस करना, किसी चीज की एक्टिविटी पर नजर रखना और कैमरे से जुड़े काम को ऑटोमेट करना शामिल था।

इसके बाद वे अमेरिका चले गए और जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से आगे की पढ़ाई की। यहां उन्होंने कंप्यूटर विजन और रोबोटिक्स के क्षेत्र में रिसर्च की। इतना ही नहीं उनके करियर में IBM वॉटसन लैब्स और Google जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल रहीं। Google में उन्होंने रिसर्च इंटर्न के तौर पर काम किया, जहां उनका काम 3D मैपिंग से जुड़ा था।

फिर आया साल 2012 जब मनोहर पलूरी ने Facebook में कंप्यूटर विजन रिसर्चर के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने लगातार तरक्की की। साल 2015 में वे AI के डायरेक्टर बने, 2021 में सीनियर डायरेक्टर और 2024 में कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट बन गए।

Meta में उनका काम AI की रिसर्च को ऐसे प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल करने से जुड़ा था, जिनका उपयोग कंपनी के अलग-अलग ऐप्स में किया जाता है। इस तरह उन्होंने एक रिसर्चर से लेकर दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को साथ Meta में वाइस प्रेसिडेंट तक का सफर तय किया।

कैसे काम करती है Warp Sciences Warp Sciences एक ऐसी कंपनी है, जो AI, रोबोटिक्स और केमिस्ट्री को मिलाकर नई दबाओं की खोज से जुड़ी रिसर्च को तेज करेगा। बता दें आमतौर पर नई दवा बनाने के लिए साइंटिस्ट्स को कई तरह के एक्सपेरिमेंट करने पड़ते हैं। जसके लिए वे अलग-अलग केमिकल्स को टेस्ट करते हैं, उनके रिजल्ट देखते हैं और फिर पता लगाते हैं कि कौन-सा केमिकल किसी बीमारी के इलाज में काम आ सकता है। इस पूरी प्रोसेस में काफी समय और पैसा लगता है।

Warp Sciences इसी काम को आसान और तेज बनाना चाहती है। जहां कंपनी AI की मदद से यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि किन केमिकल्स पर एक्सपेरिमेंट करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। इसके बाद रोबोटिक लैब में उन केमिकल्स को टेस्ट किया जाएगा।

यानी AI यह समझने में मदद करेगा कि आगे क्या टेस्ट करना चाहिए और रोबोट लैब में कई एक्सपेरिमेंट अपने आप करने में मदद करेंगे।

215 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई Warp Sciences को शुरुआती फंडिंग में 215 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,800 करोड़ रुपए मिले हैं। इस राउंड को लाइट स्पीड पार्टनर्स ने लीड किया। इसके अलावा IVP, माईफील्ड, लक्स कैपिटल और प्रेमजी इंवेस्ट जैसे इन्वेस्टर्स ने भी पैसा लगाया। बता दें इसकी बड़ी वजह AI और नई दवाओं की खोज का सेक्टर है। अगर AI और रोबोटिक्स की मदद से दवाएं बनाने की प्रोसेस तेज और सस्ती हो जाए, तो फार्मा कंपनियों को बड़ा फायदा हो सकता है। कैसे काम करेगी कंपनी? 1. AI से रिसर्च: AI अलग-अलग केमिकल्स और उनसे जुड़ी जानकारी का एनालिसिस करेगा। इससे साइंटिस्ट्स को नए एक्सपेरिमेंट की प्लानिंग करने में मदद मिलेगी।

2. रोबोट करेंगे टेस्टिंग: कंपनी अपनी ऑटोमेटेड लैब में रोबोट और आधुनिक मशीनों की मदद से केमिकल्स की टेस्टिंग करेगी। इससे बार-बार किए जाने वाले कई काम तेजी से हो सकेंगे।

3. रिजल्ट से सीखेगा AI: हर एक्सपेरिमेंट के रिजल्ट रिकॉर्ड किए जाएंगे। इन रिजल्ट के आधार पर साइंटिस्ट्स और एआई यह समझ सकेंगे कि आगे किस तरह के एक्सपेरिमेंट करने चाहिए।

करियर में नई शुरुआत की मिसाल मनोहर के पास अभी Warp Sciences के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी टेक्नोलॉजी को सफल साबित करने की है। अगर कंपनी इसमें कामयाब होती है, तो भविष्य में AI की मदद से नई दवाएं खोजने का तरीका बदल सकता है।

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